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*सहारनपुर विकास प्राधिकरण पर गंभीर सवाल: ‘सील’ हुई औपचारिक, अवैध निर्माण बेखौफ —

क्या सिस्टम रसूख के आगे बेबस? सहारनपुर में अवैध निर्माण पर बड़ा सियासी साया? सील टूटी, अब BJP के मंत्री-विधायक का नाम चर्चा में *

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*सहारनपुर विकास प्राधिकरण पर गंभीर सवाल: ‘सील’ हुई औपचारिक, अवैध निर्माण बेखौफ — क्या सिस्टम रसूख के आगे बेबस? सहारनपुर में अवैध निर्माण पर बड़ा सियासी साया? सील टूटी, अब BJP के मंत्री-विधायक का नाम चर्चा में *

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में सहारनपुर विकास प्राधिकरण (SDA) की कार्रवाई अब खुद कटघरे में खड़ी नजर आ रही है। शहर में अवैध निर्माणों के खिलाफ सख्ती के दावे करने वाला प्राधिकरण एक चर्चित मामले में पूरी तरह फेल दिखाई दे रहा है। आरोप है कि बिना स्वीकृत मानचित्र के बने एक बड़े बैंक्वेट हॉल पर की गई सीलिंग कार्रवाई कुछ ही घंटों में हवा हो गई, और निर्माण पहले की तरह चालू दिखाई देने लगा। अब सियासत की एंट्री? सूत्रों के अनुसार, इस मामले में एक प्रभावशाली सत्ताधारी दल के मंत्री और स्थानीय विधायक का नाम चर्चा में बताया जा रहा है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन शहर के राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि कथित “ऊपर” के दबाव के कारण कार्रवाई टिक नहीं पाई।प्राधिकरण ने इस निर्माण को अवैध बताते हुए बड़े स्तर पर कार्रवाई की थी। अधिकारियों की मौजूदगी में सील लगाई गई, फोटो खिंचे, प्रेस नोट जारी हुए और यह संदेश दिया गया कि अब शहर में नियमों का उल्लंघन करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। लेकिन जमीनी हकीकत ने इन दावों की पोल खोल दी। जिस सील को कानून की ताकत बताया गया, वह रातों-रात गायब हो गई। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर सील हटी कैसे? यदि किसी ने जबरन तोड़ी, तो मुकदमा क्यों दर्ज नहीं हुआ? और अगर प्राधिकरण ने खुद हटाई, तो आदेश किस स्तर से आया? इस पूरे मामले में अधिकारियों की चुप्पी कई गंभीर आशंकाओं को जन्म दे रही है। शहर में चर्चा है कि छोटे दुकानदारों और गरीब लोगों के निर्माण पर बुलडोजर चलाने वाला प्राधिकरण बड़े और रसूखदार लोगों के सामने नरम पड़ जाता है। कई मामलों में मामूली अतिक्रमण पर सख्त कार्रवाई होती है, लेकिन बड़े अवैध निर्माण वर्षों तक खड़े रहते हैं। इससे आम जनता में यह धारणा बन रही है कि कानून का डंडा सब पर बराबर नहीं चलता।सूत्रों का दावा है कि अवैध निर्माणों के नियमितीकरण के नाम पर भारी भरकम रकम वसूली जाती है और बाद में कार्रवाई ठंडी पड़ जाती है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन शहर में यह चर्चा आम है।इस घटना ने प्राधिकरण की साख पर गहरा धब्बा लगा दिया है। हाल ही में SDA ने अभियान चलाकर अवैध निर्माणों के खिलाफ सख्त छवि बनाने की कोशिश की थी, लेकिन इस मामले ने उस छवि को कमजोर कर दिया है। अब लोग पूछ रहे हैं कि क्या कार्रवाई केवल दिखावे के लिए होती है?विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी अवैध निर्माण को सील किया जाता है, तो उसे खोलना या हटाना कानूनी प्रक्रिया के बिना संभव नहीं होता। ऐसे में यदि सील हट गई है, तो यह गंभीर प्रशासनिक लापरवाही या दबाव का संकेत हो सकता है। स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो अवैध निर्माणों का सिलसिला और तेज हो जाएगा तथा शहर का नियोजित विकास प्रभावित होगा। यह मामला सिर्फ एक इमारत का नहीं, बल्कि शासन-प्रशासन की विश्वसनीयता का है। यदि नियमों का पालन कराने वाली संस्था ही सवालों के घेरे में आ जाए, तो कानून व्यवस्था पर जनता का भरोसा कमजोर पड़ना स्वाभाविक है।अब देखने वाली बात यह होगी कि प्राधिकरण इस मामले पर चुप्पी तोड़ता है या फिर यह भी अन्य विवादों की तरह समय के साथ ठंडे बस्ते में चला जाएगा। फिलहाल “सख्ती” की कहानी पर “रसूख” भारी पड़ता नजर आ रहा है।

✍️ रिपोर्ट: एलिक सिंह
संपादक – वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज़
ब्यूरो प्रमुख – हलचल इंडिया न्यूज़
ब्यूरो प्रमुख – दैनिक आशंका बुलेटिन, सहारनपुर

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